Jain Acharya : मुनि संघ के आचार्य कैसे होते हैं ?

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Jain Acharya : मुनि संघ के आचार्य कैसे होते हैं ? प्रो.अनेकांत कुमार जैन , नई दिल्ली जैन परम्परा में श्रमण संघ के आचार्य के सम्बन्ध में प्रायः लोगों को आरंभिक परिभाषा का ही पता है कि–‘ जो मुनि संघ के नायक होते हैं वे आचार्य परमेष्ठी कहलाते हैं’,यहाँ जानकारी के लिए जैन आगमों में …

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Acharya Shantisagar : आचार्य शान्तिसागर जी महाराज के आध्यात्मिक उपदेशों का वैशिष्ट्य

Acharya Shantisagar : आचार्य शान्तिसागर जी महाराज के आध्यात्मिक उपदेशों का वैशिष्ट्य प्रो.अनेकांत कुमार जैन आचार्य – जैनदर्शन विभाग श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय , नई दिल्ली दिगंबर जैनधर्म के इतिहास में अनेक तेजस्वी आचार्य एवं तपस्वियों ने आत्मकल्याण ,धर्म की प्रभावना,प्रचार एवं जीव मात्र के कल्याण हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित किया …

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Real Yoga सहजता ही वास्तविक योग है

विश्व योग दिवस पर विशेष ….                            सहजता ही वास्तविक योग है : Real yoga Prof Anekant Kumar Jain  जैन परंपरा में त्रिगुप्ति का सिद्धांत योग विद्या का प्राण है । मन गुप्ति ,वचन गुप्ति और काय गुप्ति अर्थात् मन वाणी और काया …

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IGNORAYNAMAH : जगत की निंदा प्रशंसा से कुछ नहीं होता : ॐ इग्नोराय नमः

Prof Anekant Kumar Jain

IGNORAYNAMAH : जगत की निंदा प्रशंसा से कुछ नहीं होता प्रो.अनेकान्त कुमार जैन ,नई दिल्ली  हममें से अधिकांश लोग लोक की सारहीन निंदा या प्रशंसा के चक्कर में आकर अपना बहुमूल्य मन,जीवन और समय व्यर्थ गवां दिया करते हैं । संसार ओछे लोगों का साम्राज्य है । यहाँ चप्पे चप्पे पर ऐसे लोग मिल जाते …

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YOGA : बच्चे योगी होते हैं और बड़े प्रतियोगी

YOGA : बच्चे योगी होते हैं और बड़े प्रतियोगी(जो पीछे छूट गए हैं उन्हें साथ जोड़ना योग है) प्रो अनेकान्त कुमार जैन ,नई दिल्ली   YOGA   YOGA : योग शब्द का मूल अर्थ है जोड़ना । जहाँ बुद्धि पूर्वक जोड़ा जाय वह योग है और जो स्वयं ही जुड़ जाए वह संयोग है । …

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CHATURMAS चातुर्मास के चार आयाम

चातुर्मास के चार आयाम CHATURMAS प्रो.अनेकांत कुमार जैन CHATURMAS चातुर्मास वह है जब चार महीने चार आराधना का महान अवसर हमें प्रकृति स्वयं प्रदान करती है ।अतः इस बहुमूल्य समय को मात्र प्रचार में खोना समझदारी नहीं है । चातुर्मास CHATURMAS के चार मुख्य आयाम हैं – सम्यक् दर्शन ,ज्ञान ,चारित्र और तप । इन …

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SANT NIWAS ‘संत निवास’ – नामकरण से पूर्व जरा सोचें !

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SANT NIWAS ‘संत निवास’ – नामकरण से पूर्व जरा सोचें ! प्रो अनेकान्त कुमार जैन ,नई दिल्ली  अक्सर कई तीर्थों आदि धार्मिक स्थानों पर जाने का अवसर प्राप्त होता है । विगत वर्षों में एक नई परंपरा विकसित हुई दिखलाई देती है और वह है – SANT NIWAS संत निवास,संत निलय ,संत भवन , संत …

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Classical language Prakrit

केंद्र सरकार द्वारा घोषित शास्त्रीय भाषा ‘प्राकृत’ का वैभव प्रो अनेकांत कुमार जैन,नई दिल्ली केंद्र सरकार ने हाल ही में भारत की सबसे प्राचीन भाषा ‘प्राकृत’ को शास्त्रीय भाषा Classical language Prakrit का दर्जा प्रदान करके एक ऐतिहासिक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है  । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी स्वयं अपने भाषणों में ,मन की बात में …

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Classical language Prakrit :शास्त्रीय भाषा का दर्जा , प्राकृत भाषा और हमारा कर्त्तव्य

Classical language Prakrit :शास्त्रीय भाषा का दर्जा , प्राकृत भाषा और हमारा कर्त्तव्य प्रो अनेकांत कुमार जैन[1] मा.संपादक- पागद-भासा(प्राकृत भाषा का प्रथम अखबार ) प्राकृत विद्या भवन ,A93/7A,छत्तरपुर एक्सटेंशन,नई दिल्ली-74 9711397716  वर्तमान में भारत सरकार ने ‘प्राकृत’ भाषा को शास्त्रीय भाषा Classical language Prakrit का दर्जा प्रदान किया है ,यह भारतीय भाषा और संस्कृति के …

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Jain Diwali : भगवान् महावीर का निर्वाण  चतुर्दशी को या अमावस्या को ?

Tirthankara Mahavir

Jain Diwali : भगवान् महावीर का निर्वाण  चतुर्दशी को या अमावस्या को ? प्रो.डॉ.अनेकांत कुमार जैन आचार्य-जैन दर्शन विभाग श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली-16 दीपावली भारत का एक ऐसा पवित्र पर्व है जिसका सम्बन्ध भारतीय संस्कृति की सभी परम्पराओं से है ।भारतीय संस्कृति के प्राचीन जैन धर्म में इस पर्व को …

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