Jain Yoga : जैन योग के बिना अधूरा है भारतीय योग

विश्व योग दिवस 21 जून पर विशेष – Jain Yoga : जैन योग के बिना अधूरा है भारतीय योग जैन योग के बिना अधूरा है भारतीय योग ✍️ प्रो.अनेकांत कुमार जैन,New Delhi भारत की दार्शनिक और धार्मिक सांस्कृतिक परंपरा का मूल लक्ष्य है – दुःख से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति । इसीलिए लगभग सभी…

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Election2024 :सुधरे मतदाता , नेता मतदाता से ,राष्ट्र स्वयं सुधरेगा

Election2024 :सुधरे मतदाता , नेता मतदाता से ,राष्ट्र स्वयं सुधरेगा loksabha election 2024 प्रो अनेकांत कुमार जैन Election2024: लोकतंत्र के सच्चे पहरेदार वे नहीं हैं जो जाति और धर्म की तरह किसी एक नेता,पार्टी या विचारधारा से जन्म से ही जुड़ जाते हैं ,उसमें आसक्त हो जाते हैं और इस चक्कर में उसकी हर गलत चीज को…

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Hukumchand Bharill

The meaning of being Dr.Hukumchand Bharill . डॉ०हुकुमचंद भारिल्ल होने के मायने

The meaning of being Dr.Hukumchand Bharill जैन जगत् में डॉ०हुकुमचंद भारिल्ल होने के मायने प्रो.डॉ० अनेकान्त कुमार जैन लगभग पिछले सात दशकों से भी अधिक समय से अपने सिद्धान्तों के साथ स्पष्टवादिता और संतुलित भाषा शैली में मूल जैन तत्त्वज्ञान को आबाल गोपाल तक के दिलोदिमाग में जमाने का नियमित रूप से कार्य कर रहे…

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Jain Populaion :How did the declining population of Jains increase? कैसे बढ़े जैनों की घटती आबादी ?

Jain Populaion :How did the declining population of Jains increase? कैसे बढ़े जैनों की घटती आबादी ? (Written on 2015 and published in various reputed magazines ……………) डॉ. अनेकांत कुमार जैन, नई दिल्ली भारत मेंJain Populaionजैनों की जनसँख्या की विकास दर नगण्य रूप से सामने आ रही है |यह एक महान चिंता का विषय है…

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jain muni

सम्यग्दृष्टि की निर्भयता Fearlessness of Samyagdrishti in the Samayasara

Samayasara: Fearlessness of Samyagdrishti in the Samayasara  सम्यग्दृष्टि की निर्भयता प्रो. अनेकांत कुमार जैन ,नई दिल्ली Samayasara Samayasara सम्यग्दृष्टि निर्भय होता है या इसे इस प्रकार भी कह सकते हैं कि जो निर्भय होता है वही सम्यग्दृष्टि होता है । Samayasara ज्ञानी को यह दृढ श्रद्धा होती है कि प्रत्येक द्रव्य स्वतंत्र है ,कोई द्रव्य किसी…

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KARMA

The principle of karma in Jain philosophy.जैन दर्शन का कर्म सिद्धांत  

डॉ.हुकुमचंद भारिल्ल निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त निबंध The principle of karma in Jain philosophy.जैन दर्शन का कर्म सिद्धांत       Prof Anekant Kumar Jain अनेकांत कुमार जैन karma : जैन धर्म ने मनुष्य के सुख तथा दुःख के कारणों की खोज की और पाया कि मनुष्य अपने सुख और दुःख का कारण…

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AADINATH

Kundalpur’s Tirthankar Adinath or Bade Baba: A Reconsideration कुंडलपुर के तीर्थंकर आदिनाथ या बड़े बाबा : एक पुनर्विचार

Kundalpur’s Tirthankar Adinath or Bade Baba: A Reconsideration कुंडलपुर के तीर्थंकर आदिनाथ या बड़े बाबा : एक पुनर्विचार प्रो अनेकान्त कुमार जैन,नई दिल्ली 3/3/22 मैं कभी कभी आचार्य समन्तभद्र के शब्द चयन पर विचार करता हूँ और आनंदित होता हूँ कि वे कितनी दूरदर्शिता से अपने साहित्य में उत्कृष्ट से उत्कृष्ट शब्द चयन पर ध्यान…

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What is the nature of Lord Mahavir’s God ?कैसा है भगवान् महावीर का भगवान् ?

What is the nature of Lord Mahavir’s God ? कैसा है भगवान् महावीर का भगवान् ? प्रो.डॉ अनेकांत कुमार जैन,नई दिल्ली Lord Mahavir’s God महावीर का ईश्वर ईसा पूर्व छठी शती में भारत के वैशाली गणराज्य के कुण्डग्राम में एक ऐसे राजकुमार ने जन्म लिया जो राज्य के शासन में तो जनतंत्र की शुरुआत कर…

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My Autobiography- Lord Mahavir मेरी आत्मकथा – तीर्थंकर  भगवान् महावीर    

“My Autobiography” – Lord Mahavir मेरी आत्मकथा  – तीर्थंकर  भगवान् महावीर       अनेक लोगों ने मेरे जीवन के बारे में बहुत कुछ लिखा है ,वो सब मेरे ज्ञान का विषय बनता रहता है ,अपने बारे में कुछ न कहो तो जो अन्यान्य लेखक लिखते हैं उसे ही मानकर चलना पड़ता है । इसलिए मैं…

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Tirthankara Mahavir

The influence of Lord Mahavir on the religion of Islam तीर्थंकर भगवान् महावीर का इस्लाम धर्म पर प्रभाव

The influence of Lord Mahavir on the religion of Islam भगवान् महावीर का इस्लाम धर्म पर प्रभाव प्रो अनेकांत कुमार जैन,नई दिल्ली तीर्थंकर भगवान् महावीर का सिद्धांत मूलतः अहिंसा, शाकाहार, समन्वय और सदाचार का हिमायती रहा है, उसकी कोशिश रही है कि सभी जीव सुख से रहें, जिओ और जीने दो- जैनधर्म का मूलमंत्र है। जैनधर्म ने…

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