Charvak Philosophy : चार्वाक : दर्शन की नन्हीं सी जान दुश्मन हजार 

Charvak Philosophy :चार्वाक : दर्शन की नन्हीं सी जान दुश्मन हजार ICPR और भोगीलाल लहेरचन्द इन्स्टीट्यूट ऑफ इण्डोलाजी दिल्ली द्वारा सर्वज्ञता विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार(5/12/25) में वहाँ के यशस्वी निदेशक आदरणीय प्रो विजय कुमार जैन जी ने मुझे Charvak Philosophy चार्वाक दर्शन का पक्ष रखने का आग्रह किया । मैंने उनकी आज्ञा को शिरोधार्य …

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प्राकृत भाषा एवं जैन विद्या के वरिष्ठ विद्वान – ‘प्रो.फूलचंद जैन’ Prof.Phoolchand Jain : एक सचित्र परिचय

प्राकृत भाषा एवं जैन विद्या के वरिष्ठ विद्वान – ‘प्रो.फूलचंद जैन’ Prof.Phoolchand Jain : एक सचित्र परिचय प्राच्य विद्या एवं जैन जगत् के वरिष्ठ मनीषी श्रुत सेवी आदरणीय  प्रो.डॉ. फूलचन्द्र जैन प्रेमी जी Prof.Phoolchand Jainश्रुत साधना की एक अनुकरणीय मिसाल हैं, जिनका पूरा जीवन मात्र और मात्र भारतीय प्राचीन विद्याओं,भाषाओँ,धर्मों,दर्शनों और संस्कृतियों को संरक्षित और …

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अच्छा है हमारी तरह प्रकृति Prakriti एकांतवादी नहीं है

अच्छा है हमारी तरह प्रकृति Prakriti एकांतवादी नहीं है कुछ ,कभी भी ,सब कुछ नहीं हो सकता |प्रकृति Prakriti संतुलन बैठाती रहती है|वह हमारी तरह भावुक और एकान्तवादी नहीं है | हम भावुकता में बहुत जल्दी जीवन के किसी एक पक्ष को सम्पूर्ण जीवन भले ही घोषित करते फिरें पर ऐसा होता नहीं हैं | …

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Kshmavani parva : आत्मा के सॉफ्टवेयर में क्षमा एंटीवायरस इंस्टाल कर के रखिये

विश्व क्षमा पर्व पर विशेष – Kshmavani parva:आत्मा के सॉफ्टवेयर में क्षमा एंटीवायरस इंस्टाल कर के रखिये      प्रो डॉ अनेकान्त कुमार जैन ,नई दिल्ली भाद्र शुक्ला अनंत चतुर्दशी के बाद आश्विन कृष्णा एकम् को क्षमावाणी पर्व विश्व मैत्री दिवस के रूप में इसीलिए मनाया जाता है कि हम सबसे पहले अपने प्रति अन्य …

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Veetraag vigyan and Arham Yoga : ‘वीतराग विज्ञान’ और ‘अर्हं योग’ दोनों  आगम सम्मत वाक्य हैं

Solahkaran bhavna

Veetraag vigyan and Arham Yoga ‘वीतराग विज्ञान’ और ‘अर्हं योग’ दोनों  आगम सम्मत वाक्य हैं प्रो अनेकान्त कुमार जैन अल्पश्रुतं श्रुतवतां परिहास-धाम, त्वद्भक्ति-रेव-मुखरी-कुरुते बलान्माम् । जिनेन्द्र सिद्धांत कोष में आगम को लेकर जिनेन्द्र वर्णी जी ने एक भूमिका लिखी है जो मेरे इस लघु लेख का अभिप्राय  प्रगट करने के लिए पर्याप्त है – ‘जैनागम …

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Solahkaran bhavna : सोलहकारण भावना : दर्शनविशुद्धि की अनिवार्यता  

Solahkaran bhavna

Solahkaran bhavna : सोलहकारण भावना : दर्शनविशुद्धि की अनिवार्यता प्रो.डॉ. अनेकान्त कुमार जैन भूमिका सम्यग्दर्शन मोक्षमार्ग की साधना का पहला सोपान है । तीर्थंकरप्रकृति  की कारणभूत Solahkaran bhavna षोडश भावनाओं में सर्वप्रधान भावना दर्शनविशुद्धि है। क्योंकि दर्शनविशुद्धि ही आत्मस्वरूप संवेदन के प्रति एक मात्र कारण है। सम्यग्दर्शन का अत्यंत निर्मल व दृढ हो जाना ही …

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Jain Acharya : मुनि संघ के आचार्य कैसे होते हैं ?

jain muni

Jain Acharya : मुनि संघ के आचार्य कैसे होते हैं ? प्रो.अनेकांत कुमार जैन , नई दिल्ली जैन परम्परा में श्रमण संघ के आचार्य के सम्बन्ध में प्रायः लोगों को आरंभिक परिभाषा का ही पता है कि–‘ जो मुनि संघ के नायक होते हैं वे आचार्य परमेष्ठी कहलाते हैं’,यहाँ जानकारी के लिए जैन आगमों में …

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Acharya Shantisagar : आचार्य शान्तिसागर जी महाराज के आध्यात्मिक उपदेशों का वैशिष्ट्य

Acharya Shantisagar : आचार्य शान्तिसागर जी महाराज के आध्यात्मिक उपदेशों का वैशिष्ट्य प्रो.अनेकांत कुमार जैन आचार्य – जैनदर्शन विभाग श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय , नई दिल्ली दिगंबर जैनधर्म के इतिहास में अनेक तेजस्वी आचार्य एवं तपस्वियों ने आत्मकल्याण ,धर्म की प्रभावना,प्रचार एवं जीव मात्र के कल्याण हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित किया …

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Real Yoga सहजता ही वास्तविक योग है

विश्व योग दिवस पर विशेष ….                            सहजता ही वास्तविक योग है : Real yoga Prof Anekant Kumar Jain  जैन परंपरा में त्रिगुप्ति का सिद्धांत योग विद्या का प्राण है । मन गुप्ति ,वचन गुप्ति और काय गुप्ति अर्थात् मन वाणी और काया …

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IGNORAYNAMAH : जगत की निंदा प्रशंसा से कुछ नहीं होता : ॐ इग्नोराय नमः

Prof Anekant Kumar Jain

IGNORAYNAMAH : जगत की निंदा प्रशंसा से कुछ नहीं होता प्रो.अनेकान्त कुमार जैन ,नई दिल्ली  हममें से अधिकांश लोग लोक की सारहीन निंदा या प्रशंसा के चक्कर में आकर अपना बहुमूल्य मन,जीवन और समय व्यर्थ गवां दिया करते हैं । संसार ओछे लोगों का साम्राज्य है । यहाँ चप्पे चप्पे पर ऐसे लोग मिल जाते …

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Jain religion or cast ? जैन धर्म या जाति ? या दोनों ? जनगणना में अनसुलझे प्रश्न ?

हज़ारों युद्ध जीतने की अपेक्षा बस स्वयं को जीत लें – तीर्थंकर महावीर Mahaveera

Tirthankara Mahavir

Mahaveer Charit महावीर चरित

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Teerthanker Rishabhdeva : तीर्थंकर ऋषभदेव का ‘सनातन’ जैनधर्म

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