Category : Blog

Prof Anekant Kumar Jain

IGNORAYNAMAH : जगत की निंदा प्रशंसा से कुछ नहीं होता : ॐ इग्नोराय नमः

IGNORAYNAMAH : जगत की निंदा प्रशंसा से कुछ नहीं होता प्रो.अनेकान्त कुमार ...

Read More

YOGA : बच्चे योगी होते हैं और बड़े प्रतियोगी

YOGA : बच्चे योगी होते हैं और बड़े प्रतियोगी(जो पीछे छूट गए ...

Read More

CHATURMAS चातुर्मास के चार आयाम

चातुर्मास के चार आयाम CHATURMAS प्रो.अनेकांत कुमार जैन CHATURMAS चातुर्मास वह है ...

Read More
sant niwas

SANT NIWAS ‘संत निवास’ – नामकरण से पूर्व जरा सोचें !

SANT NIWAS ‘संत निवास’ – नामकरण से पूर्व जरा सोचें ! प्रो ...

Read More

Classical language Prakrit

केंद्र सरकार द्वारा घोषित शास्त्रीय भाषा ‘प्राकृत’ का वैभव प्रो अनेकांत कुमार ...

Read More

Classical language Prakrit :शास्त्रीय भाषा का दर्जा , प्राकृत भाषा और हमारा कर्त्तव्य

Classical language Prakrit :शास्त्रीय भाषा का दर्जा , प्राकृत भाषा और हमारा ...

Read More
Tirthankara Mahavir

Jain Diwali : भगवान् महावीर का निर्वाण  चतुर्दशी को या अमावस्या को ?

Jain Diwali : भगवान् महावीर का निर्वाण  चतुर्दशी को या अमावस्या को ...

Read More

PAGADA BHASA (The First News paper in Prakrit Language) First Volume Introductory

PAGADA BHASA (The First News paper in Prakrit Language) First Introductory Volume ...

Read More

Prakrit Language प्राकृत और पालि भाषा हमेशा से क्लासीकल थीं : घोषित आज हुईं हैं -प्रो• फूलचन्द जैन प्रेमी, वाराणसी

Prakrit Languageप्राकृत और पालि भाषा हमेशा से क्लासीकल थीं : घोषित आज ...

Read More
DASDHAMMASARO

HISTORY OF DASHLAKSHAN PARVA :दशलक्षण पर्व की ऐतिहासिकता

HISTORY OF DASHLAKSHAN PARVA:दशलक्षण पर्व की ऐतिहासिकता प्रो.अनेकांत कुमार जैन* HISTORY OF ...

Read More

Recommended Posts

Shrutpanchmi : श्रुततीर्थ विरासत का रक्षक तीर्थंकर कौन है ? Shrutpanchmi

Jain religion or cast ? जैन धर्म या जाति ? या दोनों ? जनगणना में अनसुलझे प्रश्न ?

हज़ारों युद्ध जीतने की अपेक्षा बस स्वयं को जीत लें – तीर्थंकर महावीर Mahaveera

Tirthankara Mahavir

Mahaveer Charit महावीर चरित

Solahkaran bhavna

Teerthanker Rishabhdeva : तीर्थंकर ऋषभदेव का ‘सनातन’ जैनधर्म

काशी की पाण्डित्य परंपरा के विद्वत्-रत्न हैं :आचार्य फूलचन्द्र जैन प्रेमी Prof.Phoolchand Jain Premi

A Life Dedicated to Indian Knowledge : The Interdisciplinary Contributions of Prof.Phoolchand Jain ‘Premi’

Top Rated Posts

Recommended Posts

Shrutpanchmi : श्रुततीर्थ विरासत का रक्षक तीर्थंकर कौन है ? Shrutpanchmi

Jain religion or cast ? जैन धर्म या जाति ? या दोनों ? जनगणना में अनसुलझे प्रश्न ?

हज़ारों युद्ध जीतने की अपेक्षा बस स्वयं को जीत लें – तीर्थंकर महावीर Mahaveera

Tirthankara Mahavir

Mahaveer Charit महावीर चरित

error: Content is protected!